क्या खामोशी का शोर सुनाई देता है ? बस लबो का मुस्कुराना दिखाई देता है। बहुत प्यास थी, किसी के दीदार की, क्या बंद आँखों से, इजहार दिखाई देता है ? क्या दिलों का जलना महसूस होता है ? बस जख्मों पर मरहम दिखाई देता है। बहोत आस थी किसी के साथ की, मगर…
तरक्की और तकदीर
तरक्की और तकदीर अभी बाकी है।देखो, तस्वीर बनी अभी आधी है।।छुपते छुपाते देखते है, क्या है हाल।जब सामना होगा तो क्या होगा!सवाल है, की क्या सामना होगा?दुखता है ये अहसास, ये खालीपन,मगर अंधेरा और रात अभी बाकी है।।कहा पहुँचे यहाँ से निकल कर,रास्ता और मंजिल क्या नाराज़ है।चोट पुरानी, जख्म अभी भी ताजा है,कुछ याद…
तस्वीरें
तस्वीरें भी पुरानी, तसव्वुर भी फ़िज़ूल है,तकलीफ भी तकल्लुफ, उफ्फ! क्या धतूर है।न कोई पाबंदी, दिल भी कहाँ मजबूर है,बस रात सर्द, और दिलबर दूर है।। तलवारे मयान में, मंजर-ए-मजार है,जुबाने बाहर है, होते कत्ले आम है।इतनी है आबादी, जाने कौन हिमायती?पीठ पे खंजर, होंठो पे हसी, और हाथों में जाम है।। 0 0
फ़र्क़
कुछ कहू, फ़र्क़ पड़ता है क्या?चुप रहना मेरा, काम करता है क्या? मुझ में मैं न रहा,मैं रहा मुझे मगर,मैं रहा कहा, किसको खबर,जाने लगी है किस्की नजर,ना समझ आए, जाने कहता है क्या, बिखारा नहीं, टूटा हूं, काफ़ी नहीं है क्या?जुदा हूं तुमसे तो, बुरा हूं क्या? मंज़िल नहीं सफ़र का रहा,तन्हा रहा, मगर…
कभी सोचा है
कभी सोचा है की कितने तन्हा हो? कभी पूछा है खुद से, “कैसे हो?” अरे उदास हो… थोड़ा रहम करो… और खुद को माफ़ करो। ऐसा सोच लिया कोई समझ लेगा तुम्हें,अरे खुली किताब हो पर जवाब थोड़े ही हो। लिख लो, जैसे लो, खुद के लिए भी… धड़कन चल रही है तुम्हारी अभी,दफने हुए…
बेपरवाही
कुछ यू बेपरवाही से गिराया है,की टूट कर बिखर जाए,मसलन जुस्तजू है की छोड़ गए तुम,हम अब जाए तो किधर जाए… संभलते से ख्याल आया है,ये बताओ,सुधार जाए की बिगड़ जाए,बहोत झगड़ कर मुझसे ले तो लिए तुमने,अब ये बताओ,निभाए की मुकर जाए… क्या मासूमियत थी कमल आए हाय,की लाली,लाली भी शर्मा जाए,झुकायी इन पलको…
इश्क की वारदात
इश्क की वारदात कुछ ना थी, बस बढ़ गई, वर्ना बात कुछ ना थी। हम यू तो खिलाड़ी कम ना थे, जो खाई मात, कुछ नहीं थी। मत करो उस रात की बात फिर से, भरी बरसात में हुई जो मुलाकात कुछ न थी। चाहत थी हमें जो प्यार में बदल गई, जो की उन्होंने…